टोफू क्या है ? इसे कैसे बनाते हैं?
टोफू क्या है ? इसे कैसे बनाते हैं?
उत्तर :सोयाबीन के सूखे हुए बीज को पानी में अच्छी तरह भिगोकर पीस लेते हैं। इस मिश्रण को खूब बारीक पीसते हैं। अब इस मिश्रण में आवश्यक मात्रा में पानी मिलाकर दूध जैसी कंसिस्टेंसी बना लेते हैं। अब इस मिश्रण को फिल्टर करके गर्म करते हैं। अच्छी तरह उबालने पर दूध जैसा बन जाता है। दूध में नींबू का रस अथवा नेचुरल पनीर बनाने के दौरान प्राप्त पानी मिलाते इससे सोया पनीर अलग हो जाता है। इसे मिश्रण से अलग कर बारिक सूती कपड़े में बांधकर लटका देते हैं। जब पूरा पानी निकल जाता है तो टोफू का पिंड प्राप्त होता है। यह सामान्य दूध से बने पनीर के मुकाबले नरम होता है और इसमें कोई विशेष गंध नहीं होती है।किंतु एनसाइक्लोपीडिया ब्रिटानिका के अनुसार सोया मिल्क में कैल्शियम और मैग्नीशियम के क्लोराइड और सल्फाइड लवण मिलाने से इस मिश्रण से टोफू प्राप्त होता है।
टोफू का इस्तेमाल चीन और जापान में प्राचीन काल से होता आया है ऐसा एनसाइक्लोपीडिया ब्रिटानिका में वर्णित है। किंतु चीन का परंपरागत टोफू आजकल प्रचलित टोफू से बहुत अलग होता है। चीन में टोफू बनाने के लिए फर्मेंटेशन विधि का प्रयोग किया जाता है इस कारण इसमें कुछ विशिष्ट महक और स्वाद उत्पन्न हो जाते हैं।
टोफू का इस्तेमाल भोजन में पनीर के स्थान पर किया जाता है और यह पनीर की तरह प्रोटीन से भरपूर होता है। इसे सीधे तौर पर अथवा अदरक लहसुन प्याज नमक के साथ मैरीनेट कर हल्का फ्राई करके खाया जाता है। परंतु इंडियन रसोई में जिस प्रकार पनीर के तरह-तरह के व्यंजन बनाए जाते हैं उसी तरह टोफू के भी बहुत से व्यंजन बनाए जाते हैं। शाकाहारी दो तरह के होते हैं - पहला जो लोग पादप उत्पादों के साथ कुछ जंतु उत्पाद जैसे शहद, दूध और दूध से बने आहार ग्रहण करते हैं और दूसरे वेगन जो कोई भी जंतु उत्पाद आहार के रूप में नहीं लेते हैं। इस प्रकार वेगन के लिए टोफू एक बेहतर प्रोटीन एनरिच फूड ऑप्शन हो सकता है। भारत जैसे देशों में जहां सोयाबीन का उपयोग दाल के रूप में नहीं होता है बल्कि सामान्य तौर पर सोयाबड़ी के रूप में होता है सोयाबीन के मूल्य अपेक्षाकृत कम है। टोफू के रूप में सोयाबीन का उपयोग आहार संबंधी विविधता को बढ़ावा देगा और डेयरी उद्योग पर हमारी निर्भरता को कुछ कम करेगा।
